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Vision of Youth in Hindi

दक्षिण एशिया के लिए युवाओं का स्वप्न ( दृष्टिकोण)

 

दक्षिण एशिया के युवाओं के लिए चुनौती:

 

निम्न विषय पर 5 मिनट का एक वीडियो बनाना :

“दक्षिण एशिया के लिए मेरा स्वप्न-यदि मैं अपने देश का राष्ट्रपति/प्रधानमंत्री होता ”

 

विषय पर प्रतिभाव:

अफ़ग़ानिस्तान, बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका के 198 युवाओं ने दक्षिण एशिया के लिए साहसिक और प्रेरक दृष्टिकोणों के वीडियो के साथ प्रतिभाव दिए ! नीचे दिया गया दृष्टिकोण इन्हीं वीडियो में से कुछ से लिया गया है, जो 198 वीडियो में निहित भावनाओं और दृष्टिकोणों को समाहित और प्रतिबिंबित करता है! दक्षिण एशिया के युवाओं द्वारा व्यक्त दृष्टिकोणों का यह कोलाज दक्षिण एशियाई लोगों की ऐतिहासिक आकांक्षाओं और कुछ रणनीतियों का प्रतिनिधित्व करता है जिन पर हम एक सहयोगात्मक भविष्य प्राप्त करने के लिए विचार कर सकते हैं।

 

दक्षिण एशिया के लिए युवाओं का दृष्टिकोण:

 

१. दक्षिण एशिया स्वाभाविक रूप से सीमाओं से रहित है। इसलिए, सीमाओं को लागू करने के बजाय, हमें एक ऐसे सह-अस्तित्व में रहना चाहिए जो आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और सांस्कृतिक आधाररेखाओं पर टिका हो।

 

२. हमें ऐसे भविष्य की मज़बूत नींव रखनी होगी और इसके लिए आंतरिक विकास और सार्वभौमिक शिक्षा आवश्यक है। इसके लिए हमें राष्ट्रीय रोज़गार बढ़ाने, स्थानीय शिक्षण संस्थानों का निर्माण करने और क्षेत्रीय छात्र-विनिमय कार्यक्रमों तथा डिजिटल स्कूल नेटवर्क में निवेश करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

 

३. हम इस सत्य को स्वीकार करते हैं कि शांति के लिए संवाद और स्वतंत्रता, सीमा पार गतिशीलता और लोगों के बीच होने वाली राजनीति की आवश्यकता होती है। यही हमारे देशों के बीच मौजूदा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए आधार बनेगा। इस सिद्धांत को अपनाने से हमें पर्यावरणीय आपदा -जो हमारे सिर पर मंडरा रही है – जैसे संकट के समय में एक साथ मिलकर आगे बढ़ने में मदद मिलेगी । यह हमारे सामूहिक भविष्य का मूल है और इसके लिए तत्काल और ठोस समाधान की आवश्यकता है।  हमें संयुक्त नदी कार्यक्रमों, क्षेत्रीय उत्सर्जन न्यूनीकरण परियोजनाओं और ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने के बारे में बहुत गंभीर होना होगा।

 

४. अक्सर, हमें दक्षिण एशियाई आर्थिक ब्लॉक के माध्यम एकीकरण के लिए एक साझा दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस होती है। यह राष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक विकास के पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील मॉडलों का अनुसरण और मार्गदर्शन करेगा, जिसका नेतृत्व शिक्षित, जुड़े हुए और नवोन्मेषी लोगों की एक युवा पीढ़ी करेगी।  सरल नरम सीमाएँ और समुद्री संपर्क के द्वारा, प्रभुत्व के बजाय समानता और साझा चिंताओं पर आधारित मुक्त व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।

 

५. सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) का पुन:प्राणित होना इन दृष्टिकोणों का एक मूर्त रूप हो सकता है।

 

दक्षिण एशिया के लिए युवाओं के दृष्टिकोण को साकार करने हेतु आवश्यक पहल:

युवाओं को मंच प्रदान करने की गतिविधियाँ आवश्यक हैं। इन्हें पुन: पुन: दोहराया जाना चाहिए। एक नेता का ज़िम्मेदारी ग्रहण करने से दूर के प्रतीत होने वाले मुद्दे सामने आते हैं और हमारे घरों के करीब आते हैं। यह युवाओं को एक व्यापक और अधिक अंतरंग वास्तविकता को समझने की प्रेरणा प्रदान करता है ताकि वे इसकी संरचना में क्षीणता की पहचान कर सकें और हमारी दुनिया को बनाए रखने, सुधारने और बदलने के लिए अथक प्रयास कर सकें।

 

आइए, हम एक-दूसरे को विभाजित पड़ोसियों के रूप में देखना बंद करें और एकजुट परिवारों की तरह कार्य करना शुरू करें… कोई देश छोटे नहीं हैं, केवल मजबूत साझेदारियाँ हैं । कोई गरीब लोग नहीं, कोई गरीब देश नहीं, केवल अप्रयुक्त क्षमताएँ हैं।

 

संकलनकर्ता: कबीर राव – भारत,

शेर अब्बास – पाकिस्तान